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क्या आप सरकार से इंडिया नहीं भारत का नाम भारत ही हो का उपयोग करने के लिए और जिओ और जीने दो भारतीय मुद्रा पर अंकित हो का ज्ञापन / प्रतिज्ञा और क्रियान्यवन करवानै के अभियान में हमारा साथ देंगे जी प्रेरणां और आशिर्वाद , संत शिरोमंणी आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज भारत गौरव,साधना शिरोमंणी आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज अहिंसा चैनल और अहिंसा आंदोलन से जुड़िए / सहयोग कीजिए👉 आपका समर्थन और एक रु० / या अधिक का सहयोग अति महत्वपूर्ण होगा जी, तदानुसार :- साधारण सदस्य /विशिष्ट सदस्य / सहयोगी /परम सहयोगी / संरक्षक परम संरक्षक / शिरोमंणी संरक्षक बनाए जावेंगें- नगद दें अथवा पै टी एम 📲9654720200 करें जी बैंक आकाउंट 👉 -त्रिलोक जैन ,गुड़गांव बैंक का सेविंग अकाउंट हे -भारतीय स्टेट बैंक SBI अ०न०-36013788284 IFS - SBIN0014678 पर भेजकर हमें बतावें 🙏 को क्रियान्वयन करवाने हेतु त्रिलोक जैन (डायरेक्टर) अहिंसा चैनल 📲 9654720200 🥏9871120200 📧ahinsatv@gmail.com📡www.ahinsatv.com विशिष्ठ सहयोगियों को अहिंसा रत्न,अहिंसा नव रत्न पुरस्कार,अहिंसा अनमोल रत्न पुरस्कार की उपाधी-से विभुषित किया जाएगा
🛑🛑🛑🛑🛑🛑🛑🛑🛑🛑 चोपडा कुंड के द्वार संस्था के कर्मचारियों ने अंतर्मना प्रसन्न सागर जी गुरुदेव के आशीर्वाद व प्रेरणा से खोले और कहा कि संस्था से हमारी मांगे व असहयोग आंदोलन यथावत रहेगा l तीर्थराज सम्मेदशिखर की सिद्ध भूमि पर परम पूज्य, उभयमासोपवासी, महातपोमार्तण्ड, दुर्धरतप शाश्वत तीर्थराज सम्मेदशिखर पर्वत पर कठिन तप , अखण्डमौन साधना करने वाले *साधना महोदधि अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज कि प्रेरणा एवं आशीर्वाद से अंतर्मना संघ सानिध्य मै सम्पूर्ण जैन समाज को 40 महिने से बन्द पडा चौपड़ा कुण्ड के जिनालय को खुलवाकर भक्तो को दिया अपनी तप साधना से अतिशय पुण्य का उपहार। इस शुभ संयोग पर मंदिर कर्मचारियों कि और से द्वारिका रेजवार जी ने कहा कि हम सभी बहुत भाग्य शाली है कि हमारे शाश्वत तीर्थ राज सम्मेद शिखर पर्वत की पारस नाथ टोंक पर साधना महोदधि अन्तर्मना आचार्य श्री108 प्रसन्न सागर जी महाराज की 557 दिन की उत्कृष्ट सिंहनिष्कड़ित व्रत की मोन तप साधना चल रही है l हम सभी गुरुवर कि अतिभव्य साधना से प्रभावित है l अंतर्मना गुरुदेव ने हमें आशीर्वाद व प्रेरणा दी कि आप भगवान के द्वार खोल दो, भगवान आपको सुखी, स्वस्थ और प्रसन्न रखेगा l अतएव हमने अंतर्मना गुरुदेव के आशीर्वाद कों अपना अहोभाग्य मानते हुवे साथ ही सम्पूर्ण भारत व विश्व के सभी जैन भाइयों कि आस्था व श्रद्धा कों ध्यान मे रखते हुवे हम सभी साथी कर्मचारियों ने आपसी समन्वयक से यह यह निर्णय लिया है कि मंदिर के द्वार सभी भक्तों के लिए खोल दिए जाये l और नियमित भगवान कि पूजा अर्चना हो l साथ ही सम्बंधित संस्था से हमारी मांगे और असहयोग आंदोलन यथावत रहेगा l आज अक्षय तृतीया का महाशुभ संयोग है l आज ही के दिन भगवान बद्रीनाथ के पट खुलते है, और आज हम भी अंतर्मना गुरुदेव के समक्ष उनके आशीर्वाद व प्रेरणा से हमारे पारस बाबा के द्वार खोल रहे है l इस पावन पुनीत अवसर पर अंतर्मना आचार्य श्री ने अपने लिखित संदेश मे कहा कि - णमो सव्व सिद्धाणं* प्रिय आत्मन--अनन्त प्रेम । *- जिनकी बदौलत से हमे दौलत मिल रही है । हमारा घर,परिवार फल फूल रहा है ,आज वो ही परमात्मा 40 महिनो से बिना अभिषेक, पूजा,पाठ,विधान के बैठे थे । आज मन अति प्रसन्न हो रहा है कि - *अक्षय तृतीया जैसा महान पर्व *- उत्कृष्ट सिंहनिष्क़ीडित ब्रत मध्य के 16 उपवास की महा पारणा एवं 40 महिनो से बन्द पढा चौपड़ा कुण्ड जिनालय के भव्य द्वार उद्घाटन करके सम्पूर्ण जैन समाज को चौपड़ा कुण्ड का उपहार दिया एवं नित्य जिनाभिषेक ,पूजा-पाठ का उत्सव, आने बाले हजारो लाखो तीर्थ यात्रीयो के उत्साह मै कारण बनेगा। तीर्थराज सम्मेद शिखर पर्वत पर यह त्रय मणिकांचन संजोग, चोपड़ा कुंड पर विराजित ज्योतिर्मयी जिन मंदिर की दहलीज पर सम्पूर्ण जैन समाज के सुख सौभाग्य सदभाव,प्रेम-मैत्री पुण्य प्रभात का उदय है...। - सबके जीवन की सुख,शान्ति समृद्धि आंहिसा प्रेम की मंगलमय कामना करता हू । सबको आशीर्वाद। अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागर
कुण्डलपुर में आज- 27 रथों द्वारा 7 फेरी। उमड़ा जन सैलाब-आत्मा के स्वरूप को पहचान कर कल्याण के मार्ग पर चलने का प्रयास करें- आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज दमोह। कुण्डलपुर महामहोत्सव में पंचकल्याणक के अंतिम दिन 24 तीर्थंकर भगवान को मोक्ष कल्याणक महोत्सव पर भक्तों को दिव्य देशना प्रदान करते हुए संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने कहा कि आप लोग जीव की पहचान शरीर की अवस्था में देखकर ही कर लेते हैं, शरीरातीत अवस्था का हम विचार ही नहीं करते,क्या वह स्वरूप होगा पहले सोचो उसमें कुछ सुगंधित पदार्थ है, अन्य योग भी हो सकते हैं उसमें से कुछ स्पर्श ज्ञान हो गया, सुगंधी आई तो नासिका में चली गई, गंध का बोध हो गया देख रहे हैं,आंखों से दिख रहा है, पीला पीला वर्ण का है जो तेरे मन के द्वारा इन चारों गुणों का इंद्रियों के माध्यम से ज्ञात हो गया है ,भैया यह बताओ उसका स्वाद कैसा आया छूने से तो स्वाद नहीं आया सूंघने से भी स्वाद नहीं आया और सुनने से भी स्वाद नहीं आया अब कौन सा रह गया महाराज हमें तो स्वाद बता दो स्वाद कहां से आएगा, भैया ऐसे ही सिद्ध परमेष्ठी का स्वाद किसी को भी नहीं आता केवल जब शरीरातील होगा तब स्वाद आएगा ऐसा आत्मा का स्वरूप है हम आत्मा के स्वरूप की बात तो करते हैं ,स्वरूप से बात नहीं करते बात करने की नहीं है किंतु उसका अनुभव करने की बात है प्रवचन शास्त्र में आचार्य कुंदकुंद देव ने इस स्वरूप का विवेचन किया है,अरिहंत परमेष्ठी आदि क्या करते हैं ,अरहंत परमेष्ठी वाना से रहित हो गए क्योंकि अंतराय कर्म की बात समाप्त हो गई बे क्या करते हैं, एकमात्र परमसुख का ध्यान करते हैं जब महाराज अनंत हो गया उन्हें उपलब्ध कौन से सुख का ध्यान करते हैं, अब उनको ध्यान करने की क्या आवश्यकता है नहीं अरहंत परमेष्ठी होने के उपरांत भी वे स्वास्थ नहीं हुए हैं महाराज, पर दवाएं खाएंगे नहीं ना दवाई से, ना हवा से ,ना दुआ से वह तो एक मात्र स्वयंभुवा से ही स्वस्थ होंगे फिर सोचा की अनंत चतुष्टय के बाद भी कुछ भ्रांतियां विद्यमान है, मंजिल से जुड़ा हुआ जीना रहता है लेकिन जीना जीना रहता है मंजिल नहीं रहती आपने खरीदा कोई महाप्रसाद और सीढियों के ऊपर से जा रहे हैं जा रहे हैं मार्ग क्या वस्तु है यही समझ में आ पाता है किंतु ऊपर पहुंचाने के लिए सीढियां होती है, किंतु सीढ़ियां तो मंजिल से बाहर ही रहती है, मार्ग हमेशा हमेशा मार्ग रहता है आप लोगों ने वर्षों से यह सपना देखा है ,अतीत की उन खामियों में भी गए होंगे आपने अनागत की ऊंचाइयों की ओर भी मन को दौड़ाया होगा वह दिन वह घड़ी वह क्षण कब प्राप्त होगा, बड़े बाबा का पंचकल्याणक महोत्सव इन सब घाटियों से हटकर के तब वह होगा बोलो हो चुका है हमें भी शुरू करना हमें भी स्वरूप प्राप्त करना है, अभी मैं सुन रहा था बोलियां चढ़ती चढ़ती रुक जाती है बोलियां चढ़ती चढ़ती रुक जाती हैं मैं सोच रहा था इनको चाबी नहीं मिल रही होगी या चाबी मिलने के बाद भी ताला खुल नहीं रहा होगा कभी कभी बहुत सारी चाबियां रहती है, तो ताला खोल नहीं सकते, प्रतिक्रमण पाठ में हमें पढ़ने को उपलब्ध होता है सभी ग्रंथियों को मैं छोड़ देता हूं निरग्रंथ अवस्था को प्राप्त करता हूं, इसके उपरांत मैं वस्त्र को छोड़ देता हूं और दिगंबरत्व को स्वीकार करता हूं महाराज दिगंबर अवस्था को प्राप्त कर गए, अभी यह शरीर यदि है तो उसे व्यर्थ ही जोड़ रखा है एक उढा़ हुआ वस्त्र उतार देना दूसरा वस्त्र पहन लेना किंतु शरीर ही जब वस्त्र है तो आज वह दिगंबर तो प्राप्त हुआ जो सिद्ध परमेष्ठी को प्राप्त हुआ है ,अरिहंत परमेष्ठी भी अभी शरीर को ओढ़ कर रखे हैं आज निर्वाण कल्याणक यहां कुण्डलपुर में मनाया गया है, किंतु भगवान की अनुपस्थिति में मनाया गया है सब कल्याण शरीर सहित रहते थे तो उसी को हम लोग देख रहे थे, लेकिन जब प्राण आयु समाप्त हुआ सिद्ध बनने के उपरांत ही वे पूज्यनीय हुए। देवाविदेव 1008 भगवान आदिनाथ बड़े बाबा की पावन धरा कुण्डलपुर मे जिनबिम्ब पंचकल्याणक महामहोत्सव के सानंद समापन संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के आर्शीवाद और स संघ सनिध्य में सिद्ध तीर्थ क्षेत्र कुण्डलपुर में 27 गजरथ द्वारा 9 फेरी के साथ संपन्न हुआ। एक किलोमीटर का एक फेरा जिसमें आगे आगे गुरुदेव फिर महापात्र रथ पर सवार होकर नमोकर महामंत्र का जाप कर रहे थे, जगह-जगह बैंड बाजों की स्वर लहरियों ने शोभा यात्रा में चल रहे जन समुदाय को नाचने पर मजबूर कर दिया। हजारों की संख्या में सड़क के दोनों तरफ उपस्थित श्रावक श्राविका एवं जन समुदाय जय जयकारें लगाते हुए जुलूस में चलते हुए भक्तों का उत्साह वर्धन कर रहे थे, णमोकार के मंत्र की जाप कर रहे। दिव्य घोष, बालिका मंडल की प्रस्तुति सभी श्रद्धालु थिरकते नजर आए। जैन धर्म की झांकियां, क्षेत्रीय समूह नृत्य, जिनशासन प्रभावना, मंत्रोच्चार शुद्धि, नगर शुद्धि करती हुई सौभाग्यवती महिलाएं, लोकांत्रिक देवो द्वारा आह्वान, कमल पर श्री जी का विहारकराती हुई देवियां, 01 स्वर्ण रथ, 06रजत रथ, 20 काष्ठ रथ के द्वारा 9 फेरी आकर्षण का केंद्र बनी। संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज आगे आगे चल रहे थे और उनके पीछे मुनिसंघ, आर्यिका माताजी का सानिध्य मे महाआकर्षक भव्य गजरथ, देश में प्रथम बार ऐतिहासिक, भव्य, अलौकिक प्रभावना करती हुई विशाल शोभायात्रा निकली। समारोह के मुख्य आकर्षण का केन्द्र यह रहे तीर्थ क्षैत्र मे 10 दिवसीय जिन बिम्ब पंचकल्याणक महामहोत्सव से धर्म की आराधना हुई, मंत्रो से यह पवित्र धरा गुजांयमान रही, लगभग 500 एकड़ क्षैत्रफल में फेले अतिभव्य समारोह सानंद सम्पन्न हुआ। इस अनुठे आयोजन मे समय समय पर अथितियो ने आकर भगवान बड़े बाबा की पूजन किया और छोटे बाबा का आर्शीवाद प्राप्त किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, पीयूष गोयल, प्रहलाद सिंह पटेल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह,पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, प्रदेश सरकार के मंत्री गोपाल भार्गव,ओम प्रकाश सकलेचा, गोविन्द सिंह राजपूत, तुलसी सिलावट, पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया, लखन घनघोरिया, समाज सेवी एवं उद्योगपति अशोक पाटनी, केविनेट दर्जा प्राप्त राहुल सिंह, प्रदुम्न सिंह, दमोह विधायक अजय टंडन, जबेरा विधायक धर्मेन्द्र सिंह, हटा विधायक पी एल तंतुवाय, जिला पंचायत अध्यक्ष शिव चरण पटेल, भाजपा जिला अध्यक्ष एड प्रीतम सिंह,कांग्रेस जिला अध्यक्ष मनु मिश्रा सहित कई हस्तियां शामिल हुई, महोत्सव क्षैत्र में केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने प्रथम फेरी से सहभागी बनकर सौभाग्य प्राप्त किया और दमोह विधायक अजय टंडन ने खुद टैक्टर चलाकर गजरथ महोत्सव में फेरी पूर्ण की। कुण्डलपुर महामहोत्सव समिति, कुण्डलपुर कमेटी ने मध्यप्रदेश सरकार, जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, सभी श्रद्धालु, समिति प्रभारियों, सभी कर्मठ कार्यकर्तागण का आभार अध्यक्ष संतोष सिंघई, सावन सिंघई, देवेन्द्र सेठ, वीरेन्द्र बजाज, नवीन निराला, प्रशासनिक समिती प्रभारी नरेन्द्र बजाज, सुरक्षा प्रभारी नरेन्द्र बजाज, बाजार प्रभारी प्रभात सेठ, इलेक्ट्रोनिक मीडिया प्रभारी अटल राजेंद्र जैन, प्रिंट मीडिया प्रभारी महेन्द्र जैन, जयकुमार जलज, मानव बजाज, सोनू नेता, मनीष आउटलुक , गजरथ फेरी प्रभारी सुनील सुनील डबुल्या, सुनील जबेरा, मंटू जैन ने माना। आज से होगा बड़े बाबा का महामस्तकाभिषेक इस सदी के सबसे बड़े पंचकल्याणक के सफ़ल आयोजन के सम्पन्न होने के साथ ही 24 फरवरी से संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के ससंघ सनिध्य में शुभारंभ होगा, जिसमे देश विदेश के श्रद्धालुओ के पहुंचने की सम्भावना है
इंडियन एयरलाइंस का नाम भारत एयरलाइंस किया जाए माननीय श्री ज्योतिरादित्य जी सिंधिया,नागरिक एवं उड्डयन मंत्रालय ,भारत सरकार के मंत्री कुंडलपुर पधारे ,इस अवसर पर उन्हें भारत बने भारत और पूरे देश में गौ हत्या बंद हो के सहयोग हेतु अहिंसा सहयोग अभिनंदन प्रशस्ति प्रदान की गई,जिसे उन्होंने स्वीकार करते हुए बड़े बाबा-छोटे बाबा को सिर लगा कर नमन किया,इसअवसर पर उनसे मांग की गई कि कि आप भारत बने भारत अभियान के प्रमुख प्रणेंता बन सकते हैं ,आप इंडिया एयरलाइंस का नाम बदलकर भारत एयरलाइंस कर दीजिए जिससे पूरे विश्व में हमारे देश का नाम भारत स्थापित होने में आपकी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी उन्होंने मुस्कुरा कर हाथ उठा कर इस हेतु आश्वासन दिया,इस संदर्भ में उनसे अहिंसा आंदोलन का प्रतिनिधिमंडल उनके दिल्ली प्रवास पर उनसे मिलेगा और भारत एयरलाइंस की विधिवत घोषणा और क्रियान्वयन करने का निवेदन उनसे आभार सहित करेगा, और उन्हैं अहिंसा रत्न से सम्मानित करेगा
कुंडलपुर में उमड़ा भक्तों का सैलाब ------------- 18 क्षुल्लक दीक्षा, 176 बालिकाओं ने लिया ब्रह्मचर्य व्रत आचार्यश्री ने छह मुनियों को निर्यापक बनाया - चारों ओर से सोने की बारिस....आचार्यश्री के पाद पाद प्रच्छालन में आया 35 किलो सोना - दो लाख से अधिक लोगों ने किये बड़े बाबा और आचार्यश्री के दर्शन इतिहास रचा कुंडलपुर (दमोह)। मप्र के सबसे पवित्र दिगम्बर जैन तीर्थ कुंडलपुर में रविवार को उस समय नया इतिहास रच गया, जब 18 युवा ब्रह्मचारियों ने आचार्यश्री से क्षुल्लक दीक्षा लेकर घर का त्याग कर दिया। 176 युवतियों ने भी भगवान आदिनाथ की पुत्री ब्राह्मी और सुन्दरी बनकर आचार्यश्री से अजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लेकर संयम के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। आचार्यश्री ने आज अपने छह शिष्यों को निर्यापक मुनि बनाकर उनके पृथक संघ बनाने की घोषणा भी की। महोत्सव में आज तप कल्याणक के दिन दो लाख से अधिक लोग पहुंचे। धार्मिक अनुष्ठान, आदिकुमार को हुआ वैराग्य, आचार्यश्री ने दी दीक्षा पंचकल्याणक महोत्सव में सुबह 6 बजे से ही प्रतिष्ठाचार्य विनय भैया के निर्देशन में धार्मिक अनुष्ठान शुरु हुआ। सुबह अभिषेक, शांतिधारा के साथ नित्य पूजन किया गया। इसके बाद आचार्यश्री की पूजन हुई। आचार्यश्री ने संक्षिप्त प्रवचन में कहा कि महोत्सव में बड़ी संख्या में लोग आये हैं। यहां बड़ी संख्या में देवगण भी बैठे हैं। यह देव अपनी विक्रिया ऋद्धि से ऐसी व्यवस्था करेंगे कि महोत्सव में सभी लोग समां जाएंगे। छह निर्यापक मुनियों की घोषणा आचार्यश्री ने दोपहर की सभा में छह मुनियों श्री समतासागर जी महाराज, श्री प्रशांतसागर जी महाराज, श्री प्रसादसागर जी महाराज, श्री अभयसागर जी महाराज, श्री संभवसागर जी महाराज, श्री वीरसागर जी महाराज को निर्यापक मुनि बनाते हुए इनके पृथक संघ बनाते हुए कहा कि यह सभी मुनि महाराज अपने अपने संघ का ठीक से संचालन करेंगे। 18 क्षुल्लक दीक्षायें आचार्यश्री ने आज 18 युवा ब्रह्मचारियों को क्षुल्लक दीक्षा दी। पहली बार आचार्यश्री ने दीक्षा के मंत्र पढे और निर्यापक मुनिश्री समयसागर जी महाराज, मुनिश्री योगसागर जी महाराज, मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने दीक्षा के संस्कार किये। क्षुल्लक दीक्षा लेने वालों में ब्रह्मचारी राहुल भैया सागर, राजेश भैया सागर, भूपेन्द्र भैया ललितपुर, सुमित भैया गुना, मयूर भैया विदिशा, ईश्वरदास भैया महाराजपुर, सचिन भैया मुंगावली, मानस भैया इंदौर, सचिन भैया पुसद महाराष्ट्र, प्रांसुल जैन सतना, अविचल भैया गुना, राजा भैया खिमलासा, अमित भैया ललितपुर, मयूर भैया सुर्खी, अर्पित भैया फिरोजाबाद, चंदन भैया फिरोजपुर पंजाब, कार्तिक भैया दमोह, सौरभ भैया सागर शामिल हैं। महोत्सव में सोना बरसा तप कल्याणक के अवसर पर दिल्ली से आए दो व्यापारियों ने दो किलो सोना भेंट कर आचार्यश्री के पाद प्रच्छालन किये। इन दोनों व्यापारियों ने कल आचार्यश्री आहार कराने की खुशी में सवा नौ, सवा नौ किलो सोना कुंडलपुर के बड़े बाबा के मंदिर के शिखर के लिये भेंट किया। मंच संचालक अमित पडरिया ने शिखर पर 101 किलो चढ़ाने की बात कही तो पूरे पांडाल में चारों ओर से सोने की वर्षा होने लगी। सैकड़ों महिलाओं ने अपने गहने उतारकर बड़े बाबा के शिखर के लिये समर्पित कर दिये। बताया जाता है कि कल से आज तक लगभग 35 किलो एकत्रित हो चूका है। 176 बालिकाओं ने लिया ब्रह्मचर्य व्रत कुंडलपुर में आज उस समय इतिहास रच गया जब एक साथ 176 बालिकाओं ने आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज से अजीव ब्रह्मचर्य व्रत धारण कर मोक्ष मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। यह सभी बहनें उच्च शिक्षा प्राप्त हैं। इनमें से बहनों को पास तीन तीन चार चार डिग्रियां भी हैं। आचार्यश्री से व्रत लेने के बाद अब यह बहनें आर्यिका श्री आदर्शमति माता जी के संघ में रहकर प्रतिभा स्थली में शिक्षण कार्य करेंगीं। संभवतः यह सैकड़ों वर्षों बाद सुनने में आया है कि एक दिन में इतनी बड़ी संख्या में बहनों ने ब्रह्मचर्य व्रत लिया हो।
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